नवरात्रि · दिन 2
ब्रह्मचारिणी
तप की देवी
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।
देवी के बारे में
दुर्गा का दूसरा रूप। ब्रह्मचारिणी तपस्या और भक्ति की प्रतीक हैं। उनके दाहिने हाथ में जप माला और बाएँ हाथ में कमण्डलु है। उनकी पूजा से धैर्य, संयम और स्थिरता मिलती है।
भोग: शक्कर (या मिश्री)
इसे अपना बनाएँ
वैकल्पिक। आपका नाम और गोत्र संकल्प में भर जाएगा। केवल इसी डिवाइस पर सहेजा जाता है।
पूजा सामग्री
- देवी की तस्वीर या मूर्ति
- लाल वस्त्र (चुनरी) और स्वच्छ आसन
- रोली / कुमकुम, अक्षत
- लाल फूल (गुड़हल देवी को प्रिय है), माला
- अगरबत्ती / धूप, कपूर
- घी या तेल का दीपक, बत्तियाँ
- कलश या छोटे पात्र में जल, आम के पत्ते
- फल, नारियल और उस दिन का भोग
- भोग: शक्कर (या मिश्री)
पूजा विधि (चरण)
-
शुद्धि और तैयारी
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान साफ करें और लाल वस्त्र बिछाएँ। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और देवी की तस्वीर या मूर्ति सामने रखें।
-
संकल्प
दाहिने हाथ में जल, थोड़े अक्षत और एक फूल लेकर संकल्प बोलें, फिर जल छोड़ दें। नीचे आपका गोत्र और नाम आपकी सहेजी गई पसंद से भरा जाता है।
मम (आपका गोत्र)-गोत्रे उत्पन्नस्य (आपका नाम)-नाम्नः ममोपात्त-समस्त-दुरित-क्षयद्वारा श्रीदुर्गा-प्रीत्यर्थं नवरात्र-पूजनमहं करिष्ये॥
mama (आपका गोत्र)-gotre utpannasya (आपका नाम)-nāmnaḥ mamopātta-samasta-durita-kṣaya-dvārā shrī-durgā-prītyarthaṃ navarātra-pūjanam ahaṃ kariṣye ||
-
गणेश वन्दना
विघ्न दूर करने के लिए सबसे पहले श्री गणेश को प्रणाम करें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
vakratuṇḍa mahākāya sūryakoṭi samaprabha | nirvighnaṃ kuru me deva sarvakāryeṣu sarvadā ||
अर्थ: हे वक्रतुण्ड, विशाल देह वाले, करोड़ सूर्यों के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्नरहित करें।
-
दीप प्रज्वलन और अर्पण
दीपक और धूप जलाएँ। देवी को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें।
-
ध्यान मन्त्र
क्षण भर नेत्र बन्द करके माँ ब्रह्मचारिणी के ध्यान मन्त्र का पाठ करें।
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
dadhānā kara-padmābhyām akṣamālā-kamaṇḍalū | devī prasīdatu mayi brahmacāriṇy-anuttamā ||
अर्थ: कमल जैसे हाथों में अक्षमाला और कमण्डलु धारण करने वाली सर्वश्रेष्ठ देवी ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।
-
स्तुति
देवी की स्तुति का पाठ करें।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
yā devī sarvabhūteṣu shakti-rūpeṇa saṃsthitā | namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ ||
अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें बारम्बार नमस्कार है।
-
भोग अर्पण
माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर (या मिश्री) का भोग फल और नारियल के साथ अर्पित करें।
-
आरती
जलते दीपक या कपूर को देवी के सामने दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाते हुए आरती गाएँ।
-
क्षमा प्रार्थना
पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥
āvāhanaṃ na jānāmi na jānāmi visarjanam | pūjāṃ caiva na jānāmi kṣamasva parameshvari ||
अर्थ: मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा की विधि। हे परमेश्वरी, मुझे क्षमा करें।
-
प्रसाद वितरण
प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें, फिर स्वयं ग्रहण करें।